Secret Of Millionaire Mind book summary {with pdf }

2005 में प्रकाशित “सीक्रेट्स ऑफ द मिलिनेयर माइंड” किताब की इस हिंदी बुक समरी के माध्यम से जानिए की आखिर मिलिनेयर लोगों को मिलिनेयर बनाने वाले मिलिनेयर दिमाग का राज क्या है।
सीक्रेट्स ऑफ द मिलिनेयर माइंड यह रहस्य बताती है कि सिर्फ कुछ ही लोग अमीर क्यों बनते हैं, जबकि बाकी जिंदगी भर पैसे की समस्याओं से जूझते रहते हैं। सफलता की मूल जड़ो के बारे में सीखने के लिए सीक्रेट्स ऑफ मिलिनेयर माइंड को जरूर पढ़ें।

वे कौन सी बातें हैं आदते हैं जिनकी वजह मिलिनेयर लोग बार बार अपना धन खो जाने के बाद भी आसानी से उससे ज्यादा पा लेते हैं।

सीक्रेट्स ऑफ द मिलिनेयर माइंड का सारांश

हॉकर एकर की इस किताब के मुख्य दो भाग हैं जिनमे से हम मुख्य बातों और उनके कांसेप्ट को समझेंगे।

दोस्तों सीक्रेट्स ऑफ द मिलिनेयर माइंड किताब दो भागों में विभाजित है । पहला भाग बताता है कि धन का ब्लूप्रिंट क्या होता हैऔर कैसे यह काम करता है। टी हार्व एकर द्वारा सरल और सहज भाषा में लिखी यह किताब बताती है कि हमारे बचपन के प्रभावों ने हमारी आर्थिक तकदीर को किस तरह तय किया है। आप सीखेंगे कि अपने खुद के धन के ब्लूप्रिंट को कैसे पहचनाना है और इसे कैसे बदलना है। ताकि आप न सिर्फ सफलता पा सके बल्कि इसे कायम भी रख सके।

दूसरे भाग में आप लेखक ने दौलत से जुड़ी 17 अलग अलग तरह की फाइलों को दिया है , जो बताती है कि अमीर लोग ज्यादातर गरीब और मध्य वर्गीय लोगों से किस तरह अलग से सोचते और काम करते हैं।

भाग-1: आपके दौलत का ब्लूप्रिंट :-

ब्लूप्रिंट एक आम बोलचाल की भाषा में प्रयोग किया जाने वाला अंग्रेजी शब्द है, जिसका व्यवहारिक अर्थ होता है , “खाका”। जैसे किसी मकान, बिल्डिंग , पुल ,डैम आदि को बनाने से पहले उसका खाका एक बार कागज में बनाया जाता है , जिसके आधार पर ही वह धरातल बनता है। ठीक उसी तरह आपके दौलत का ब्लूप्रिंट भी होता है।

बचपन की बाते, घटनाएं और यादे हमारे आर्थिक भाग्य को आकार (ब्लूप्रिंट) दिया है। रुपये पैसे से जुड़ी हुई हमने बचपन से लेकर आज तक जो जो बातें सुनी हुई है, हमारा नजरिया भी वैसा ही हो गया है।

जैसा नजरिया हमारा धन के प्रति है ,वैसा ही रिश्ता भी बन जाता है । और हर किसी का पैसे और सम्पति से अलग अलग प्रकार का रिश्ता होता है।

कोई बहुत खर्चीला होता है , तो कोई पैसे और सम्पति के प्रति बहुत गभीर रहता है।
गरीब आदमी लॉटरी में करोड़ो रूपये जीतने के बाद भी ,सारे रुपये खर्च करके गरीब ही रहता है । और अमीर आदमी सब कुछ लुटाने के बाद भी फिर से पहले से ज्यादा कमाकर अमीर बनता है।

लोगों में इस प्रकार की विविधता उनके पास्ट में बीते अनुभवों की वजह से होती है। यदि किसी व्यक्ति ने अपने नजदीकियों को पैसे को फिजूल बर्बाद करता हुआ देखा है तो वो भी जाने अनजाने में ऐसा ही करता है।

धन के प्रति आज हमारा जो भी व्यवहार है , वो हमारे बीते कल की वजह से है। जिनमे हमारे माता-पिता की अहम भूमिका होती है।

उदाहरण के लिए जब भी पैसे से जुड़ी कोई समस्या हमारे सामने आती है तो हमे यह पता भी होता है कि हम उसे वैसे ही सॉल्व कर रहे होते हैं जैसे कि हमारे माता-पिता।। कि जब ऐसा होता है तो मेरी माँ भी ऐसा ही किया करती थी।

इन्ही कारणों की वजह से पैसे और सम्पति के प्रति हमारा व्यवहार या रिश्ता अलग अलग होता है।

यदि आप फलों को बदलना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले उस पेड़ की जड़ो को बदलना होगा। यदि आप अपने दृश्य को बदलना चाहते हैं , तो आपको पहले अदृश्य को बदलना होगा।

दोस्तों आर्थिक सफलता में हमेशा के लिए बदलाव लाने के लिए इसलिए जरूरत होती है इस खाके को , दौलत के इस ब्लूप्रिंट को बदलने की।

Money Blueprint कैसे बदला जाता है ।।

जब जान लेते हैं की आपका दौलत का ब्लूप्रिंट कैसा है। तो आप दौलत के ब्लूप्रिंट को बदल भी सकते हैं। ऐसा नहीं है कि ये ब्लूप्रिंट अगर बचपन से ही ऐसे ही है तो इसमें अब बदलाव नहीं हो पायेगा।
दौलत के इस ब्लूप्रिंट को बदलने के लिए जरुरी है इस ब्लूप्रिंट की प्रोग्रामिंग को समझना ।

हमारे दिमाग में बने विचार , भावनाओ को जन्म देती हैं , और इन भावनाओं के आधार पर हम कोई काम करते हैं , जिससे हमें परिणाम प्राप्त होता है।

दिमाग में धन-दौलत से जुड़े विचार, एक प्रोग्रामिंग के आधार पर बनते हैं । प्रोग्रामिंग जो हमारे पास्ट के अनुभवों और पास्ट में आपने सीखी बातों पर निर्भर करती हैं।

यानी यदि हम धन-दौलत से जुडे विचारों को बदलें तो हम आसानी से मनचाहे परिणाम पा सकते हैं। और विचारों को बदलने के जरूरी है कि प्रोग्रामिंग को बदला जाए ,उसमें जरूरी अपडेट किये जाय।

हम कह सकते हैं कि प्रोग्रामिंग हमारे विचारों को बनाती है , विचारों से भावनाये और भावनाओं के आधार पर हम काम करके , परिणाम प्राप्त करते हैं।

दौलत के ब्लूप्रिंट को बदलने के लिए इस प्रोग्रामिंग को बदलना पड़ता है , यह प्रोग्रामिंग निम्न प्रकार से बदला जाता है:-

Verbal Programming

Verbal programming का सीधा सा अर्थ धन-दौलत से जुड़ी उन हर बातों से सम्बंधित है ,जिन्हें हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। जो भी हमने अब तक धन के बारे में, अमीर लोगों के बारे में सुना है हमने उनके लिए वैसी ही धारणा बना ली है , या यूं कहें कि हमारी प्रोग्रामिंग ही इस प्रकार की हो गयी है।

हमने सुना है कि धन बुराई की जड़ होती है , अपनी धन-दौलत को बरसात के समय के लिए बचाकर रखनी चाहिए, अमीर लोग क्रिमिनल्स होते हैं, रुपये पेड़ पर नहीं उगते , धन-दौलत कभी खुशियां नहीं खरीद सकता , पैसा बोलता है आदि बाते हमने अपने आस-पास बहुत सुन रखीं हैं। और इन्हीं बातों से हम बहुत प्रभावित भी हुए हैं । इसलिए इस वर्बल प्रोग्रामिंग को बदलने के लिए इन चरणों से होकर जाना होता है

A. Awareness उन सभी कथनों को एक कागज पर लिखिए जो आपने धन, दौलत अउ अमीर लोगों के बारे सुन रखी हैं।

B. Understanding लिखिये इन कथनों ने कैसे आपकी आर्थिक जिंदगी को प्रभावित किया है।

C. Disassociation अब जो कथन आपने सुन रखें हैं ,उनके प्रति अपने आप को अलग करने का प्रयास करें , कि ये आपकी आर्थिक जिंदगी के भाग नहीं है।

D.Declaration अपना हाथ दिल पर रखें और कहें , “ मैंने जो धन, दौलत और अमीर लोगों के बारे में सुन रखा है यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि वह सही हो । मैं नई चीजों को सीखने और अपनाने को तैयार हूं

मेरे पास एक लखपति दिमाग है

Modeling

Medeling का मतलब सीधा सीधा उन बातों से है जो हमने घर में अपने माता-पिता और अभिभावकों से सीखीं होती है। कैसे हमारे घरवाले पैसे को मैनेज करते हैं, कैसे खर्च करते हैं ,कैसे बचत करते हैं ये सब बातें हम स्वत ही देख कर सीख जाते हैं । इसलिए बड़े होने पर धन-दौलत से जुड़ा ऐसा ही व्यवहार होता है। इस प्रकार की प्रोग्रामिंग को बदलने के लिए जरूरी स्टेप्स

A. Awareness देखें कि हमारे अंदर धन, दौलत से जुड़ी वे कौन सी आदतें और बाते हैं जो हमारे अभिभावकों की आदतों से मेल खाती हैं। उन्हें लिखें।

B.Understand इस मॉडलिंग से आपकी जिंदगी में हुए प्रभावों को लिखें।

C. Disassociation अपने आप को इमेजिन करें कि बिना इस मॉडलिंग के आपकी जिंदगी कैसी होती। अपने आप को इस मॉडलिंग से अलग करके देखें।

D. Declaration अपने दिल ओर हाथ रखें और कहें, “मैंने जो भी अपने माता-पिता से जो धन-दौलत के बारे में धारणा बनाई हुई है , वो उनकी थी इसलिए मैं अपने लिए नया रास्ता चुनता हूँ ” । अपने दिमाग को हाथ लगाएं और कहें ,“मेरे पास लखपति दिमाग है” ।

Specific Incidents

धन-दौलत के प्रति हमारी प्रोग्रामिंग, हमारी जिंदगी में घटी कुछ विशेष घटनाओं पर भी निर्भर करती है। जैसे आपका अनुभव ,जब आप धन, दौलत और अमीर लोगों के सम्पर्क में आये । ये अनुभव ही आपके अंदर धन – दौलत के प्रति या तो विश्वास को जन्म देते हैं, या फिर भ्रम को पैदा करते हैं। धन-दौलत से जुड़ी कोई घटना हमें भावनात्मक रूप से प्रभावित कर देती है।

इसलिए इन विशेष घटनाओं से जुड़े अनुभवों से अपने आप को अलग करने की कोशिश करें। और दिल पर हाथ रखके कहें , ” मैं धन से जुड़े हुए फालतू के अनुभवों को बाहर निकालता हूँ ,जो मैंने पास्ट में प्राप्त किये हैं। और अपना नया और अमीर भविष्य बनाता हूँ ।”
अब माथे पर हाथ रखकर कहें कि ,”मेरे पास एक लखपति दिमाग है।”

दोस्तो धन-दौलत के प्रति अपने ब्लूप्रिंट को आप बदल सकते हैं । और उसके आधार पर आप अपने विचारों के प्रति सचेत होकर, वर्तमान में उचित क्रिया करके आप धन-दौलत के असीमित सकारात्मक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

भाग 2. 17 बाते जो अमीर लोगों को गरीब लोगों से अलग बनाती हैं :-

  • #1: अमीर लोग विश्वास करते हैं कि “मैं अपनी लाइफ खुद बनाता हूँ”| जबकि एक गरीब आदमी कहता है कि “जिन्दगी ने मेरे साथ ये किया/ वो किया ”.
  • #2: गरीब लोग अक्सर पैसे के खेल को इस प्रकार खेलते हैं ताकि वे हारें न , जबकि एक अमीर व्यक्ति सिर्फ जीतने के लिए खेलता है |.
  • #3: अमीर व्यक्ति अमीर बनने के प्रति पूरी तरह कमिटेड रहता है, वह अमीर बनने के लिए हर जरूरी कदम उठाने के लिए अपने आप को तैयार रखता है | जबकि एक गरीब व्यक्ति सिर्फ अमीर होने की चाह रखता है |
  • #4:अमीर आदमी की हमेशा बड़ी सोच होती है , जबकि एक गरीब व्यक्त की छोटी ही सोच है |
  • #5: जहां गरीब आदमी मुसीबतों के बारे में सोचकर परेशान रहते हैं जबकि एक अमीर व्यक्ति हमेशा अमीर बनने के अवसरों पर .फोकस करता है |
  • #6: एक अमीर व्यक्ति सदैव दुसरे अमीर व्यक्ति का सम्मान करता है जबकि गरीब व्यक्ति अमीर आदमियों से जलता हैं , उन्हें स्वीकार नहीं करता है |
  • #7: अमीर लोग हमेशा सकारात्मक सफल लोगो से जुड़े रहते हैं , जबकि गरीब लोग नकारात्मक और असफल लोगों की संगत में रहते हैं |
  • #8: अमीर लोग अपने आप को प्रोत्साहित करते हैं | जबकि गरीब लोग सेल्लिंग और प्रमोशन के प्रति निगेटिव रहते हैं |.
  • #9: अमीर लोग हमेशा अपने आप को समस्याओं से ऊपर रखते हैं , जबकी गरीब लोग अपनी समस्याओं के सामने छोटे हो जाते हैं |
  • #10: अमीर लोगों की ग्रहण करने की क्षमता उत्तम रहती है जबकि गरीब लोगों की निम्न ग्रहण क्षमता रहती है|
  • #11: अमीर लोग धन को इन्वेस्ट करते हैं जबकि गरीब लोग खर्च करते हैं |
  • #12: अमीर लोग सोचते हैं “दोनों”. गरीब लोग सोचते हैं कि  “either/ or.”
  • #13: अमीर लोग अपनी नेट वर्थ पर फोकस करते हैं जबकि गरीब लोग अपनी आमदनी पर.
  • #14जहां गरीब लोग अपने पैसे को सही ढंग से मैनेज नहीं कर पाते हैं वहीँ अमीर लोग अपने पैसे को बहुत सही से मैनेज करते हैं |
  • #15: अमीर लोगो के पास धन उनके लिए काम करता है जबकि गरीब लोग काम करते हैं ताकि उन्हें धन प्राप्त हो सके |
  • #16गरीब लोग जहाँ डरकर मेहनत करना रोक देते हैं वहीँ अमीर लोग इस डर पर जीत पाकर काम करना जारी रखते हैं |
  • #17: अमीर लोग जहाँ हमेशा नया सीखने के प्रति उत्सुक रहते हैं वहीँ गरीब लोग सोचते हैं कि वे पहले से ही जानते हैं

इस किताब की pdf फाइल हमारे टेलीग्राम चैनल पर उपलब्ध है – सीक्रेट्स ऑफ द मिलिनेयर माइंड पीडीऍफ़ डाउनलोड

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