घर का बड़ा लड़का

घर का बड़ा लड़का
एक बात है, एक जज़्बात है 
जो आप तक पहुँचाना चाहता हूँ,
ये कहानी है घर के बड़े लड़के की है, 
जो मैं आपको सुनाना चाहता हूं।
बात कुछ यूं है कि 
मैं घर का बड़ा लड़का हूँ।
थोड़ा समझदार हूँ, थोड़ा जिम्मेदार हूँ,
बस इसीलिए घर छोड़कर निकल चुका हूँ।।
वरना…..गाँव मे एक मकान मेरा भी है, 
छोटा सा ही सही मगर माँ पापा से सजा एक जहां मेरा भी है।
एक बड़ी बहन भी है,एक छोटा भाई भी है,
और उनके सर परिस्थिति का जिम्मा कुछ मेरा भी है।
क्योंकि उमर होने लगी है पापा की,
पर घर का चूल्हा चौका तो चलना ही है।
बस यही कुछ बाते समझ चुका हूँ,
इसीलिए घर छोड़कर निकल चुका हूँ।
मैं घर का बड़ा लड़का हूँ,
थोड़ा समझदार हूँ, थोड़ा जिम्मेदार हूँ।
.
महज उम्र 18 की थी, 
जब मैंने घर की दहलीज को पार किया था। दुनिया देखी भी न थी, तब मैंने अकेले चलना शुरू किया था।
धक्के खाने की हिम्मत न थी, 
फिर भी खुद को ये समझा लिया था….कि बेटा! आज तू तपेगा नहीं,
तो कल घर में चूल्हा जलेगा नहीं,
कुछ लोग जिंदा हैं तेरे आसरे पे 
और अगर तू आज बड़ेगा नहीं तो कल उनका सब रहेगा नहीं।
 
फिर… बहन की शादी भी है, भाई की जेबखर्ची भी है, 
दीवाली भी आने वाली है और पापा की दवाई भी है।
बस….बस यही, यही कुछ बातें समझ चुका हूँ, इसीलिए घर छोड़कर निकल चुका हूँ।
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चार दीवारे और एक शीशा है घर में, 
उनसे ही कुछ बक बका लेता हूँ
खुद ही के सवालों का खुद ही जवाब दे देता हूँ।
अकेलेपन में लिपटा हूं मैं, फिर भी  सब गम छुपा लेता हूँ,
 जब फ़ोन घर से आता है, तो कुछ अटपटे किस्से भी सुना लेता हूँ।
सब दर्द भरी दास्तां भुला चुका हूँ तो सब गिले शिकवे भी मिटा चुका हूँ ।।
खुद घर से बेघर होकर, घर को आबाद करने निकल चुका हूँ।
मैं घर का बड़ा लड़का हूं, घर छोड़कर निकल चुका हूं।।
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खाना बनाने से नफरत थी मुझे 
पर आज टेढ़ी मेड़ी रोटियां भी पका लेता हूँ, खाने में नखरे करने वाला
आज कच्चा-पक्का कुछ भी खा लेता हूँ।
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पर अफसोस क्या करूँ……
“ये तो दस्तूर है दुनियां का”
बस यही कह के दिल को बहला लेता हूँ।
हां! मैं घर का बड़ा लड़का हूँ थोड़ा समझदार हूँ, थोड़ा जिम्मेदार हूँ।
नितिन सेमवाल
रचनाकार  अनुसूया प्रसाद बहुगुणा अगस्त्यमुनि महाविद्यालय के छात्र हैं, विज्ञान वर्ग की पढ़ाई के साथ-साथ लेखन में भी शौक रखते हैं।
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22 thoughts on “घर का बड़ा लड़का”

  1. Sabass mera lata khub nam roshan kar😁comment करने वाले व्यक्ति भी उसी क्लास तथा उसी कॉलेज से हैं 😜😜😜😂

    Reply
  2. Sabass mera lata khub nam roshan kar😁comment करने वाले व्यक्ति भी उसी क्लास तथा उसी कॉलेज से हैं 😜😜😜😂

    Reply
  3. Keep it up and I am happy that In today era when your age group busy with irresponsible work you at least aware with your responsibilities and working.
    God bless you my dear, jai Bholynath,jai Mahashiv🙏🙏

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  4. आशीष जी ! घर का बड़ा लड़का कविता पढ़कर अपना जैसा महसूस हुआ. ऐसा लगा जैसे शब्दो ने अतीत को बुनकर एक पर्दा मेरी आँखो के सामने टाग दीया हो. एक एक शब्द अपना सा होकर गुजरा. आपकी कविता घर के हर बड़े लड़को दर्शाती है जो इन परिस्थितियों से होकर वो गुजरते हैं. मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि आपकी कलम दिन रात तरक्की करें. Merajazbaa.com धन्यवाद

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  5. दिल की गहराइयो से ब्यक्त की गयी है ये लाइने।।।
    बहुत सुंदर भाई जी👌👌👌

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