खुला खत : एक बेटे का माता-पिता के लिए

DEAR PARENTS: Please listen to us……
The message of their children to parents who are often unhappy with their children ??
मम्मी-पापा I have something to say to you.
बहुत समय से सोच रहा था,सोचा आज बोल ही देता हूँ।
भले समझने के लिए थोड़ा वक़्त ले लेना,पर आज इत्मिनान से मेरी बात सुन लेना…..
आपके सामने खुश रहने की ‘एक्टिंग’ अब और नहीं हो पाएगी।
ये कोई phase नहीं ये मेरी ‘फीलिंग्स’ और ‘इमोशंस’ हैं।
लोग क्या कहेंगे इससे इन भावनाओं को कोई फर्क नहीं पड़ता।
हाँ मैं पूरा दिन अपने फोन में लगा रहता हूँ। कोई मिलता ही नहीं, सुनने के लिए जब
तब सर उठा कर ऊपर देखता हूँ।
नहीं हूँ मैं मामा के लड़के जैसा,मुझे वैसा बनना है कब था।
अक्सर रात 3 बजे कुछ एक अज़ीब-सा ख्याल जगाये रखता है,कल को अगर मैं न रहूँ तो किसी को क्या फर्क पड़ता है?
ऐसे में महँगा जहर भी सस्ता लगता है।
“हमारी डांट में ही प्यार है” तब नहीं सुनना चाहता हूँ।
कभी-कभी सोचता हूँ काश मैं सोचना रोक पाता,
आप अगर एक बार सुन लेते तो आपके कंधे पर सर रख कर रो पाता।
खत लिखूँ या मैसेज करके फटाफट ‘फैमिली ग्रुप” छोड़ दूँ?
असली बात बताऊँ या फ़िर ”सब ठीक है” कहकर जाने दूँ?
सच बताया तो आप डांट कर फोन तो नहीं छीन लोगे ना?
अपने बचपन की कठिनाईयों से हमारी ‘प्रॉब्लम’ कम्पियर तो नहीं करोगे ना?
आप मेरी मुश्किलों को नकली कह कर नकार तो नहीं दोगे ना?
मेरे एक बार मना करने  पर जब  आप दुबारा पुछोगे तब
जानता हूँ शुरू में थोड़ा अज़ीब तो जरूर लगेगा,
आपको हमारी जनरेशन की प्रॉब्लम को समझने के लिए थोड़ा वक़्त देना पड़ेगा।
बचपन में आपको भी बात नहीं सिर्फ रिस्पेक्ट करना सिखाया गया था।
भले ही आज थोड़ा वक़्त ले लेना,पर आज इत्मिनान से मेरी बात सुन लेना।
सुन लेना जब मैं कहूँ-मेरा मन नहीं है,और मत कहना कि मुझसे बेहतर तो मौसी का बेटा है।
सुन लेना जब किसी बेमतलब सी छोटी-सी बात पर रो पडूँ,और मत कहना कि मैं तो बहुत ‘सेंसिटिव’ हूँ।
सुन लेना जब मैं कहूँ कि की कुछ चीज़ें मुझे Trigger’ करती हैं,और मत कहना कि इन सब के लिए अभी मेरी उम्र ही नहीं है।
सुन लेना जब मैं कुछ ‘डिसीज़न’ अपने लिए खुद ही ले लूँ, और मत कहना कि कभी आपके बारे में सोचता ही नहीं हूँ।
दुनिया अपने आप में काफी मुश्किलों से भरी है,और इस सब में आपके ‘सपोर्ट’ की कमी सबसे ज्यादा चुभती है।
अपने घर में तो मुझे कुछ भी बोलने की आजादी होनी चाहिए,
असली लड़ाई तो मेरी बाहर की दुनिया से होनी चाहिए।
ये कह कर मेरा मकसद नहीं था आपका दिल दुखाना,
आप भी मेरा साथ देना और हमेशा मेरा साथ निभाना।
बहुत मुश्किल था आपसे आज ये सब कह पाना,
पर ये सुनने के बाद आप भी एक बार आके हाल पूछ जाना।
आपका नादान लाडला
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