आखिर क्यों हर रोज हमें ईश्वर की प्रार्थना करनी चाहिए!

कारण ईश्वर की प्रार्थना करने के

शुक्रगुज़ार हों
दोस्तों प्रायः हम अपनी जिन्दगी में खुद को टेक्नोलॉजी का गुलाम बना लेते हैं,कभी आँखें मोबाइल पर गढ़ी रहती हैं,तो कभी OTT PLATFORM पर कब एक अरसा बीत जाता है ये पता भी नहीं चलता,टेक्नोलॉजी जहाँ हमें एक तरफ आलसी बना रही है,वहीं दूसरी तरफ प्रभु भक्ति से भी हमें दूर कर रही है।
हम 2 मिनट प्रभु का ध्यान करने को भी तैयार नहीं हैं,ना हमें इसमें कोई दिलचसपी रही है,मॉडर्न बनने के चक्कर में हम अपनी संस्कृति से भी मुँह मोड़ रहे हैं।हम ना घर के रहे ना घाट के।
जब हाथ की एक ऊँगली काम करना बंद कर देती है,तो डॉक्टर लाखों रुपए लेते हैं उसे ठीक करने के लिए।
ज़रा सोचिए उस परवरदिगार ने हमें कितना कुछ दिया है।ये जीवन दिया,ये हवा,ये पानी और भी कितना कुछ।कुछ लिया है आजतक हमसे।वो देता रहा हमें सबकुछ पेड़ की तरह और हम उसी को काटना अपना मकसद बना बैठे। सुबह उठ कर हम उसका शुक्रिया अदा करने के बजाय शिकायतें करते हैं-उसे ये दिया,इसे वो दिया बस! मुझे ए खुदा तूने कुछ ना दिया।
जब भी कभी लगे कि उस खुदा ने मुझसे ज्यात्ति की है,तो देखिये उस बेचारे गरीब को जिसके पास छ्त नहीं है,आपको शायद लगेगा कि इसके साथ भी की है।
पर देखिए ज़रा उन अमीरों पर उन लोगों पर,जो शायद आपकी नज़र में सफल हैं, क्यों उन्हें डिप्रेशन जैसी ख़तरनाक चीज़ों का सामना करना पड़ रहा है,जबकि उनके पास तो बहुत पैसा है।
पूछियेगा खुद से कि क्या उनसे बदतर जिन्दगी जी रहा हूँ मैं? जिस दिन अपने स्वयं से ये सवाल पूछ लिया तो जबान से बस यही लफ्ज़ निकलेंगे-
मैं शुक्रगुजार हूँ।
आप स्वयं से ही दिन में 3 बार प्रभु का स्मरण करें।
पहला जागते वक़्त-हे प्रभु! आज का दिन मेरी जिन्दगी का सबसे बड़ा दिन है,इस दिन के लिए मैं शुक्रगुज़ार हूँ।
दूसरा खाते वक़्त-हे प्रभु! आज के दिन मुझे भूखे पेट नहीं सोना पड़ा मैं शुक्रगुज़ार हूँ।
तीसरा सोते वक़्त-हे प्रभु! आज का दिन मेरी जिन्दगी का सबसे खूबसूरत दिन था,इस दिन के लिए मैं शुक्रगुज़ार हूँ।
खुश रहिये ? खुशियाँ बांटते रहिये ?
शुक्रगुज़ार रहिये ??
लेखक- अमन जग्गी

Leave a Comment