ओ से ओखली : उर्ख्याली (ओखली)

“पा…….पा! पा…पा !” जूली रोते-रोते चिल्लाई | पास में पापा फ़ोन पर बात कर रहे थे | संदीप की नजर जोर से रो रही अपनी बेटी पर पड़ी जिसने अपनी रोने की आवाज से पूरा …

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october

अक्टूबर : खत्म नहीं ,अभी शुरू हुआ है |

अक्टूबर! खत्म होने वाला है | लेकिन जो ये अपने साथ लेकर आया है, वह नहीं | हर साल जब भी अक्टूबर आता है, अपने साथ दशहरा-दिवाली की छुट्टियाँ लेकर आता है | घर , …

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Sunset in pauri

पौढ़ी में कभी दोपहर नहीं होती है … एक खूबसूरत शाम होती है

पौढ़ी में कभी दोपहर नहीं होती है ,सुबह होती है, दिन चढ़ता है और सीधे शाम होती है |  दोपहर के समय ही पौढ़ी की धूप , पौढ़ी को अलविदा कहकर , सामने के पहाड़ की …

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हिंदी लेख : मैं गाँव बोल रहा हूँ

“मैं गाँव बोल रहा हूँ, मुझे जानते तो हो न !” : हिंदी लेख

मैं गाँव बोल रहा हूँ | क्यों ! आप लोग मुझे जानते तो होगे ना | मैं क्यों बोल रहा हूँ , कैसे बोल रहा हूँ ? इस समय ये सवाल करना बेफिजूल है | …

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